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25 साल बाद भी शहीद जावेद अंसारी को न्याय नहीं, स्मृति द्वार की मांग तेज

25 साल बाद भी शहीद जावेद अंसारी को न्याय नहीं, स्मृति द्वार की मांग तेज

 

मुहम्मदाबाद (गाजीपुर)।

देश की रक्षा करते हुए 02 सितंबर 2000 को शहीद हुए जावेद अहमद अंसारी को शहादत के करीब पच्चीस वर्ष बीत जाने के बाद भी वह सम्मान नहीं मिल सका, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। शहीद के अंतिम संस्कार के समय जिले के तमाम अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे और कई आश्वासन दिए गए, लेकिन आज तक न तो शहीद के नाम से कोई स्मृति द्वार बनाया गया और न ही उनकी मजार के पास समुचित व्यवस्था की गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार केवल एक बाउंड्री कराकर जिम्मेदारी पूरी मान ली गई, जबकि मजार के पास न तो इंटरलॉकिंग कराई गई है और न ही नियमित सफाई होती है।

इस मुद्दे को लेकर अब जनप्रतिनिधियों ने भी आवाज बुलंद कर दी है। मुहम्मदाबाद नगर के सभासद हैदर अली उर्फ कल्लू ने नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि शहीद जावेद अहमद अंसारी के नाम से सड़क किनारे स्मृति द्वार का निर्माण कराया जाए, मजार के पास व पटरी पर इंटरलॉकिंग कराई जाए तथा महीने में कम से कम चार बार साफ-सफाई सुनिश्चित की जाए।

इससे पूर्व शहीद के मित्र शराफत अली भी जिलाधिकारी के समक्ष यही मांग रख चुके हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहीदों का सम्मान केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि धरातल पर भी दिखाई देना चाहिए। स्मृति द्वार की मांग अब तेज होती जा रही है।

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