शहीद ब्रिगेडियर उस्मान और पूर्व उपराष्ट्रपति का क्या है अंसारी परिवार से रिश्ता आप भी जाने क्या है सच्चाई
शाहनवाज़ अहमद

शहीद ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और यूसुफपुर का अंसारी परिवार का इतिहास
आज, 3 जुलाई, शेर-ए-नौशेरा, परम वीर योद्धा ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के शहादत दिवस पर पूरा देश उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन कर रहा है। ऐसे अवसर पर अपेक्षा होती है कि हम उनके अद्वितीय सैन्य योगदान, राष्ट्रभक्ति और बलिदान को स्मरण करें। दुर्भाग्य से कुछ समय से कुछ राजनीतिक कारणों से यह प्रचारित किया जा रहा है कि ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का यूसुफपुर के अंसारी परिवार से कोई संबंध था ही नहीं ।
जब असत्य को बार-बार और पूरे जोर से दोहराया जाने लगे, तब इतिहास के सत्य को तथ्यों सहित सामने रखना आवश्यक हो जाता है।
सबसे पहले ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के पैतृक परिवार को समझना होगा। उनके पिता खान बहादुर मोहम्मद फारूक बनारस के शहर कोतवाल थे। उनका वंश सूफी संत अहमद बंदगी खोंदामिर से माना जाता है, जिनका मजार आज भी मऊ जनपद के बीबीपुर में स्थित है। यह परिवार मूलतः वर्तमान अफ़ग़ानिस्तान के खोंदामिर क्षेत्र से सल्तनत काल में भारत आया और बीबीपुर में आबाद हुआ। पारिवारिक परंपरा के अनुसार यह वंश इस्लाम के तीसरे ख़लीफ़ा हज़रत उस्मान ग़नी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से जुड़ा माना जाता है, इसलिए यह परिवार “उस्मानियान-ए-बीबीपुर” के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
इसी प्रकार यूसुफपुर का प्रसिद्ध अंसारी परिवार की वंश परंपरा अफ़ग़ानिस्तान के हेरात स्थित सूफी संत ख्वाजा अब्दुल्लाह अंसारी के भारत आने वाले वंशज क़ाज़ी युसूफ से जुडती है और जिनका नसब पैग़म्बर हज़रत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के मेज़बान हज़रत अबू अय्यूब अंसारी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से है। दोनों परिवारों के बीच कई सदियों से वैवाहिक संबंध रहे हैं।
इसी पारिवारिक परंपरा में खान बहादुर मोहम्मद फारूक खोंदामिर जो ब्रिटिश काल में बनारस के शहर कोतवाल थे का विवाह यूसुफपुर के प्रतिष्ठित अंसारी परिवार में जनाब क़ाज़ी अब्दुल कबीर साहब की पुत्री जमीलुन्निसा बेगम से हुआ। जमीलुन्निसा बेगम, पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद हामिद अंसारी की फूफी (बुआ) थीं। इस प्रकार ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और मोहम्मद हामिद अंसारी फूफीज़ाद भाई थे।
जमीलुन्निसा बेगम की दूसरी बहन मुकद्दसुन्निसा बेगम का विवाह क़ाज़ी मोहम्मद कासिम साहब से हुआ, जो काज़ी सुभानुल्लाह के पिता और वर्तमान सांसद अफ़ज़ाल अंसारी के दादा थे । इस प्रकार ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और काज़ी सुभानुल्लाह सगे ख़ालाज़ाद भाई थे।
रिश्तों का यह क्रम यहीं समाप्त नहीं होता। ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान की सगी बहन अज़मतुन्निसा बेगम का विवाह मोहम्मद हामिद अंसारी के चाचा डॉ.अब्दुल हफ़ीज़ अंसारी से हुआ जिनके पुत्र डॉ.कामिल अंसारी माने हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वैज्ञानिक है । ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के मामा जनाब अब्दुल मजीद अंसारी के पुत्र जनाब अब्दुल रशीद अंसारी का परिवार भी पीढ़ियों से यूसुफपुर में ही आबाद है, जो इस मातृपक्षीय संबंध का एक और प्रत्यक्ष प्रमाण है। वहीं ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के छोटे भाई, ब्रिगेडियर गुफ़रान, का विवाह मेरे पिता स्वर्गीय अब्दुल मालिक अंसारी की फूफी से हुआ। ये सभी संबंध इस बात के साक्षी हैं कि दोनों परिवार केवल परिचित नहीं थे, बल्कि कई पीढ़ियों से गहरे वैवाहिक और पारिवारिक संबंधों से जुड़े हुए थे।
अक्सर एक प्रश्न पूछा जाता है कि यदि ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का यूसुफपुर से कोई संबंध नहीं था और उनका विवाह भी नहीं हुआ था, तो अंसारी परिवार के कुछ सदस्य विशेष कर सांसद अफ़ज़ाल अंसारी उन्हें “नाना” क्यों कहते हैं?
इसका उत्तर मुस्लिम पारिवारिक परंपराओं में निहित है। अफ़ज़ाल अंसारी के नाना काज़ी कलीमुल हक़ भी , ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के ही एक कज़िन थे। ननिहाल के रिश्तों को भी परिवार में सम्मान देने के कारण ब्रिगेडियर उस्मान को सम्मानपूर्वक “नाना” कहा जाता रहा। वास्तव में यदि रक्त संबंध की निकटता देखी जाए, तो अफ़ज़ाल अंसारी के पिता काज़ी सुभानुल्लाह स्वयं ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के सगे ख़ालाज़ाद भाई थे। अतः इस संबोधन को समझने के लिए भारतीय संयुक्त मुस्लिम परिवारों की सामाजिक परंपराओं को समझना आवश्यक है।
यही यहाँ यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए कि किसी महान व्यक्ति से पारिवारिक संबंध होना अपने-आप में कोई उपलब्धि नहीं है। वह संबंध तभी सार्थक है, जब हम उनके जीवन से प्रेरणा लें, उनके आदर्शों का अनुसरण करें और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखें। ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान ने अपने प्राण मातृभूमि के लिए न्योछावर कर दिए। उनका वास्तविक सम्मान उनके नाम पर राजनीति करने से नहीं, बल्कि उनके साहस, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति को अपनाने से होगा।
दुर्भाग्य तब होता है जब वे लोग, जिन्होंने राष्ट्र के लिए कोई उल्लेखनीय त्याग नहीं किया, अपने राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इतिहास, पारिवारिक संबंधों और दिवंगत पूर्वजों तक पर प्रश्नचिह्न लगाने लगते हैं। इतिहास को राजनीतिक सुविधा के अनुसार बदला नहीं जा सकता। यदि किसी तथ्य पर असहमति है, तो उसका उत्तर प्रमाणों, दस्तावेज़ों और शोध से दिया जाना चाहिए, न कि निराधार प्रचार से।
आज, ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के शहादत दिवस पर, उन्हें हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके बलिदान को याद रखें, सत्य का सम्मान करें और इतिहास को राजनीति का बंधक न बनने दें। मेरा, अथवा मेरे खानदान के किसी भी सदस्य का, डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी या शहीद ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान से दूर या निकट का जो भी पारिवारिक संबंध रहा हो, वह तभी सार्थक है जब वह केवल उनके नाम का उल्लेख करके सम्मान प्राप्त करने तक सीमित न रहे, बल्कि उनकी स्मृति, उनके सिद्धांतों, उनके आदर्शों और उनकी महान परंपरा को जीवित रखने का माध्यम बने।
किसी महापुरुष से रक्त संबंध होना अपने-आप में कोई उपलब्धि नहीं है। वास्तविक सम्मान तब है जब हम उनके जीवन से प्रेरणा लें, उनके चरित्र, त्याग, राष्ट्रसेवा, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करें। यदि हम ऐसा नहीं करते, तो केवल उनके नाम या रिश्ते का उल्लेख करना एक औपचारिकता मात्र रह जाएगा।
आज जब हम शहीद ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान के सर्वोच्च बलिदान को नमन कर रहे हैं, तब हमारा दायित्व है कि उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सत्य, राष्ट्रहित और सामाजिक सद्भाव की उस परंपरा को आगे बढ़ाएँ, जिसके लिए उन्होंने अपना सर्वस्व अर्पित कर दिया।
संदर्भ
1- पारिवारिक शिजरा और रिकॉर्ड पाण्डुलिपि
2- अन्सरिज़ ऑफ़ युसुफपुर -महमूद अंसारी
3- आज़मगढ़ : एक गज़ेटियर — आगरा और अवध के संयुक्त प्रान्त के जिला गज़ेटियर, खंड 33- डगलस लायनेल ड्रेक-ब्रॉकमैन-1909
4- गाज़ीपुर : जिला गज़ेटियर — आगरा एवं अवध के संयुक्त प्रान्त के जिला गज़ेटियर, खंड–29- हरबर्ट आर. नेविल-1911




