अंधेरे से जंग का असली योद्धा: रेयाज़ अहमद की दमदार मौजूदगी

गाजीपुर जनपद के मुहम्मदाबाद नगर में जब भी अंधेरा दस्तक देता है, तो एक नाम उम्मीद बनकर उभरता है—रेयाज़ अहमद। ये सिर्फ एक समाजसेवी नहीं, बल्कि वो जुझारू चेहरा हैं जो रात की खामोशी हो या दिन की तपिश, हर हाल में बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए डटे रहते हैं।
जैसे ही कहीं फाल्ट होता है, पूरे नगर में सबसे पहले उनकी आवाज़ गूंजती है। ग्रुप के माध्यम से हर अपडेट, हर सूचना लोगों तक पहुंचती है। लेकिन ये सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं—जब तक तारों में करंट वापस नहीं दौड़ता, तब तक रेयाज़ अहमद खुद लाइनमैनों के साथ मैदान में मौजूद रहते हैं।
कुंडेसर पावर हाउस से लेकर मुहम्मदाबाद तक फैली 33 केवी लाइन के वे खतरनाक और सुनसान रास्ते, जहां दिन में भी लोग कदम रखने से कतराते हैं—वहां रेयाज़ अहमद और लाइनमैनों की टीम बिना डरे, बिना थके डटी रहती है। धूप, बारिश, कड़ाके की ठंड या झुलसाती गर्मी—कोई मौसम इनके हौसले को रोक नहीं पाता।
आज के दौर में जहां कुछ लोग सिर्फ 10 मिनट खड़े होकर दर्जनों फोटो खिंचवाकर खुद को ‘हीरो’ साबित करने में लगे हैं, वहीं रेयाज़ अहमद का अंदाज बिल्कुल अलग है। न कोई दिखावा, न कोई शोर—सिर्फ काम, और वो भी पूरी ईमानदारी के साथ।
यही वजह है कि नगर के हर घर में, हर गली में, हर दिल में उनकी पहचान बन चुकी है। रेयाज़ अहमद वो नाम है, जो सिर्फ बोला नहीं जाता—महसूस किया जाता है। ऐसे समाजसेवी वाकई इस समाज की असली ताकत हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के, हर अंधेरे से लड़कर रोशनी लाने का जज्बा रखते हैं।




