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इतिहास की धरोहर बना ‘ऑफिस’ — गाज़ीपुर की ओल्डम लाइब्रेरी अब पहचान को तरस रही

रेयाज अहमद की रिपोर्ट

गाज़ीपुर शहर के मिश्र बाज़ार स्थित वह ऐतिहासिक इमारत, जो कभी ज्ञान का केंद्र और जनपद की सबसे समृद्ध लाइब्रेरी हुआ करती थी, आज अपनी पहचान खोकर एक साधारण कार्यालय बनकर रह गई है। “ओल्डम लाइब्रेरी” के नाम से मशहूर यह धरोहर आज “आज का कार्यालय” के रूप में जानी जाती है, जबकि कभी यहां शहर के लोग दूर-दूर से किताबें और अखबार पढ़ने आया करते थे।
इस लाइब्रेरी की स्थापना तत्कालीन ब्रिटिश कलेक्टर Wilton Oldham ने 19वीं सदी में कराई थी। ओल्डम सिर्फ एक प्रशासक नहीं, बल्कि गाज़ीपुर के इतिहास को संजोने वाले एक महान इतिहासकार भी थे। उन्होंने अपने कार्यकाल (1870–1880 के दशक) में गाज़ीपुर के ऐतिहासिक स्थलों की खुदाई करवाई, प्रसिद्ध पुरातत्वविदों जैसे Alexander Cunningham और A. C. L. Carlleyle को आमंत्रित किया, और जनपद के इतिहास पर महत्वपूर्ण ग्रंथ लिखे।


ओल्डम द्वारा स्थापित यह लाइब्रेरी उस दौर में ज्ञान का भंडार थी, जहां देश-विदेश की चुनिंदा पुस्तकें और दस्तावेज़ सुरक्षित रखे गए थे। यह लाइब्रेरी कलेक्टर के अधीन संचालित होती थी और इसकी देखरेख के लिए विशेष कर्मचारियों की नियुक्ति भी की गई थी। लेकिन समय के साथ यह धरोहर उपेक्षा का शिकार होती चली गई।
सूत्रों के अनुसार, यहां रखी अधिकांश बहुमूल्य पुस्तकें अब पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कॉलेज, गोरा बाज़ार के शोध संस्थान में पहुंच चुकी हैं, जबकि शेष किताबें धीरे-धीरे गायब हो गईं।
गाज़ीपुर जनपद का इतिहास 1818 ईस्वी में ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित होने से शुरू होता है। शुरुआती कलेक्टर Barlow (1818–1828) ने जनपद की सीमाओं का निर्धारण किया, प्रशासनिक ढांचे को मजबूत किया और अफीम उत्पादन व्यवस्था की नींव रखी। इसके बाद H. R. Nevill (1902–1907) ने गाज़ीपुर गजेटियर की रचना कर जिले के इतिहास, शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक ढांचे का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया।
आज विडंबना यह है कि जिस ओल्डम लाइब्रेरी को शहर के ज्ञान और इतिहास का प्रतीक माना जाता था, वह अब लोगों की यादों से भी ओझल हो चुकी है। नई पीढ़ी इस ऐतिहासिक धरोहर के महत्व से अनजान है।
❗ सवाल यह है कि—क्या गाज़ीपुर प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस ऐतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने की पहल करेंगे, या यह इमारत यूं ही इतिहास के अंधेरे में खोती रहेगी?

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