
चंदा यादव के नेतृत्व में रेलवे प्रशासन को ज्ञापन, कोविड काल में बंद ठहराव बहाल करने की मांग
गाजीपुर जनपद के यूसुफपुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेनों के ठहराव और यात्री सुविधाओं को लेकर अब मामला सिर्फ मांग तक सीमित नहीं रहने वाला है। लंबे समय से उपेक्षित मांगों को लेकर क्षेत्रीय लोगों ने आंदोलन की तैयारी शुरू कर दी है। इसी क्रम में पूर्व ब्लॉक प्रमुख चंदा यादव के नेतृत्व में स्टेशन अधीक्षक के माध्यम से पूर्वोत्तर रेलवे के वाराणसी मंडल के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
क्षेत्रवासियों की सबसे बड़ी मांग प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों को यूसुफपुर स्टेशन पर ठहराव देने और कोविड-19 के दौरान बंद किए गए ट्रेनों के पुराने ठहराव को दोबारा शुरू करने की है। इसके साथ ही स्टेशन पर यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं के विस्तार की मांग भी उठाई गई है।
‘ट्रेन यहां से गुजरती है, लेकिन यात्री चढ़ नहीं पाते’
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यूसुफपुर स्टेशन आसपास के दर्जनों गांवों के हजारों लोगों के आवागमन का महत्वपूर्ण केंद्र है। रोजगार, नौकरी, व्यापार और शिक्षा के सिलसिले में बड़ी संख्या में लोग देश के अलग-अलग शहरों में आते-जाते हैं। बावजूद इसके कई महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से यात्रियों को गाजीपुर या बलिया जैसे दूसरे स्टेशनों तक जाना पड़ता है।
इससे यात्रियों को अतिरिक्त समय के साथ आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ता है। लोगों का सवाल है कि जब यूसुफपुर क्षेत्र की आबादी और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, तो रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाएं और ट्रेन ठहराव उसी अनुपात में क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे?
शहीदों की धरती, फिर भी रेल सुविधाओं का इंतजार
चंदा यादव ने कहा कि यूसुफपुर सिर्फ एक रेलवे स्टेशन नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र का प्रमुख यातायात केंद्र है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 18 अगस्त 1942 को डॉ. शिवपूजन राय के नेतृत्व में क्षेत्र के वीर सपूतों ने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया था।
उन्होंने कहा कि अमर शहीदों की धरती शेरपुर सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों के लिए यूसुफपुर रेलवे स्टेशन आवागमन का प्रमुख साधन है। ऐसे क्षेत्र में महत्वपूर्ण ट्रेनों का ठहराव नहीं होना यात्रियों के लिए लगातार परेशानी का कारण बना हुआ है।
कोविड के बाद बंद हुई सुविधाएं कब होंगी बहाल?
चंदा यादव ने आरोप लगाया कि कोविड काल के दौरान कई ट्रेनों के ठहराव बंद किए गए थे, लेकिन परिस्थितियां सामान्य होने के बावजूद कई ट्रेनों का ठहराव आज तक वापस नहीं हुआ। उन्होंने रेलवे प्रशासन से मांग की कि यात्रियों की वास्तविक जरूरत और क्षेत्र की महत्ता को देखते हुए पुराने ठहराव बहाल किए जाएं तथा नई महत्वपूर्ण एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की भी व्यवस्था की जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि रेलवे प्रशासन ने क्षेत्र की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की तो आंदोलन को आगे और व्यापक रूप दिया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान राजेंद्र यादव, अधिवक्ता प्रेमनाथ गुप्ता, आलोक राय, रमाकांत यादव, बिल्लू सिंह, पिंटू सिंह, प्रमिला राय, मनीष यादव, गोपाल सिंह यादव समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रीय लोग मौजूद रहे।

क्षेत्रवासियों ने उम्मीद जताई कि रेलवे प्रशासन जनहित की इस मांग को गंभीरता से लेते हुए जल्द ठोस निर्णय करेगा। अब नजर इस बात पर है कि यूसुफपुर की आवाज रेलवे के जिम्मेदार अधिकारियों तक सिर्फ ज्ञापन बनकर पहुंचती है या ट्रेनों के ठहराव के रूप में जमीन पर भी दिखाई देती है।




