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सुर्खियों मे रहे कोतवाल अनिल सिंह का हुआ मऊ जनपद से गाजीपुर जनपद मे ट्रांसफर

शाहनवाज़ अहमद

सुर्खियों मे रहे कोतवाल अनिल सिंह का हुआ मऊ जनपद से गाजीपुर जनपद मे ट्रांसफर…

 

गाजीपुर जिले को एक ऐसे तेजतर्रार और साहसी पुलिस अधिकारी की तैनाती मिली है, जिनकी कार्यशैली पर न सिर्फ विभाग बल्कि आम जनता भी भरोसा करती है। मऊ से ट्रांसफर होकर आए इंस्पेक्टर अनिल सिंह, जिन्हें आजमगढ़ मंडल का ‘सुपर कॉप’ कहा जाता है, बिना गोली चलाए अपराधियों को काबू में करने के लिए जाने जाते हैं। उनकी रणनीति, सूझबूझ और जोखिम उठाने की क्षमता ने उन्हें ‘खास’ बना दिया है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पुलिस सेवा की शुरुआत करने वाले इंस्पेक्टर अनिल सिंह ने #बुंदेलखंड के कई जिलों में अपनी सेवाएं दीं और उसके बाद बनारस जोन के जौनपुर से आजमगढ़ मंडल—बलिया, आजमगढ़ और मऊ में अपनी तेजतर्रार कार्यशैली से पहचान बनाई। मऊ में तैनाती के दौरान भी उन्होंने अपराध के खुलासे में कई उल्लेखनीय सफलताएं हासिल कीं, जिससे ये कैमरे की नजर में आ गए और जिसके चलते वे गुमनामी से निकलकर मऊ जिले के सोशल मीडिया के चर्चित चेहरा बन गए। खेल कोटे से यूपी पुलिस में आए अनिल सिंह न सिर्फ एक कुशल पुलिस अधिकारी हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के #वॉलीबॉल #खिलाड़ी भी रह चुके हैं। बैडमिंटन और क्रिकेट में भी उनकी अच्छी पकड़ है। रोज सुबह मऊ के स्टेडियम में खिलाड़ियों के साथ अभ्यास करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। यही खेल भावना उनके पुलिसिंग स्टाइल में भी झलकती है—जहां हर अपराधी उनके लिए एक चुनौती होता है और हर केस एक मुकाबला उनकी कार्यशैली का सबसे चर्चित उदाहरण तब सामने आया जब रेलवे कंट्रोल रूम को एक धमकी भरा ईमेल मिला, जिसमें गोरखपुर से मुंबई जा रही ट्रेन में बम होने की सूचना दी गई। मऊ जंक्शन पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए ट्रेन को रोककर तलाशी शुरू की। इसी दौरान एक संदिग्ध लावारिस ब्रीफकेस मिला। जहां अन्य लोग दूरी बना रहे थे, वहीं अनिल सिंह ने बिना अपनी जान की परवाह किए एक झाड़ू सहित उनके लंबे डंडे की मदद से उस ब्रीफकेस को भीड़भाड़ से दूर सुरक्षित स्थान पर खींचकर ले गए और बम निरोधक दस्ते को सौंप दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और उनकी बहादुरी की जमकर सराहना हुई। हालांकि, इस जोखिम भरे कदम के लिए उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों की फटकार भी सुननी पड़ी, लेकिन उनका जवाब साफ था—“जब वर्दी पहनी है तो सबसे पहले जनता की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है, बाकी सब ईश्वर पर निर्भर है।”आजमगढ़ में तैनाती के दौरान तत्कालीन एसएसपी अनुराग आर्य ने उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें साइबर क्राइम थाने की जिम्मेदारी सौंपी। वहां उन्होंने कई ब्लाइंड डबल मर्डर केसों का सफल खुलासा किया और थाना प्रदेश में अपराध निस्तारण के मामले में अव्वल बन गया।गाजीपुर उनके लिए नया क्षेत्र नहीं है। अपराधियों का पीछा करते हुए वे कई बार यहां तक पहुंच चुके हैं। कई बार आरोपियों को पकड़ने के दौरान उनके परिजनों और ग्रामीणों ने अवरोध भी उत्पन्न किए, लेकिन अनिल सिंह ने अपनी रणनीति और साहस के बल पर हर बार सफलता हासिल की।आज जब पुलिसिंग के नाम पर ‘ऑपरेशन लंगड़ा’ और ‘हाफ एनकाउंटर’ जैसे शब्द सुर्खियों में हैं, वहीं अनिल सिंह की कार्यशैली इससे अलग है। उनका स्पष्ट मानना है कि उनका काम अपराध का खुलासा कर आरोपी को कानून के हवाले करना है, बाकी फैसला अदालत का होता है।गाजीपुर में अनिल सिंह की तैनाती से न केवल पुलिस विभाग को मजबूती मिलेगी, बल्कि आम जनता में भी सुरक्षा का भरोसा बढ़ेगा। उनकी सादगी, साहस और पेशेवर ईमानदारी उन्हें वाकई ‘सुपर कॉप’ बनाती है।

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