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मगई नदी के बढ़ते जलस्तर से करइल क्षेत्र के किसानों की खरीफ फसलें संकट में, रबी की बुवाई पर भी मंडराया खतरा

शाहनवाज़ अहमद

मगई नदी के बढ़ते जलस्तर से करइल क्षेत्र के किसानों की खरीफ फसलें संकट में, रबी की बुवाई पर भी मंडराया खतरा

 

गाजीपुर जनपद के करिमुद्दीनपुर गंगा नदी का जलस्तर लगातार घटाव पर होने के बावजूद मगई नदी का रौद्र रूप करइल क्षेत्र के किसानों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। नदी के आसपास के खेतों में लगातार जलभराव होने से धान, मक्का, बाजार तथा हरी सब्जियों सहित विभिन्न खरीफ फसलों को भारी नुकसान होने की स्थिति बनी हुई है।किसानों का आरोप है कि शारदा सहायक नहर के खंड-23, खंड-32 और खंड-36 से लगातार पानी मगई नदी में छोड़े जाने के कारण नदी का जलस्तर और आसपास के खेतों में जलभराव बढ़ रहा है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसलें प्रभावित हो रही हैं और किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।किसानों की चिंता केवल खरीफ फसल तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि यदि खेतों में अत्यधिक पानी जमा रहा तो अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर तक खेत जलमग्न रहने की स्थिति बन सकती है, जिससे आगामी रबी फसल की समय से बुवाई भी प्रभावित होगी। इससे गेहूं, चना, मटर और अन्य रबी फसलों की खेती पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है।वहीं, ग्रामीणों का यह भी कहना है कि कई स्थानों पर मछुआरों द्वारा नदी में जाल, करकट और अन्य सामग्री लगाकर पानी के प्रवाह में अवरोध पैदा कर दिया जाता है। इससे नदी का प्राकृतिक बहाव बाधित होने के कारण खेतों से पानी निकलने में काफी समय लगता है और किसान लंबे समय तक जलभराव की समस्या झेलने को मजबूर होते हैं।इस समस्या से हटा, खेमपुर, नसरतपुर, मुबारकपुर, राजापुर, करीमुद्दीनपुर से लेकर सोनवानी और दौलतपुर तक के किसान प्रभावित बताए जा रहे हैं। किसानों का कहना है कि हर वर्ष जलभराव के कारण फसलों को नुकसान होता है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हो सका है।किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि मगई नदी में पानी छोड़े जाने की स्थिति की तत्काल समीक्षा की जाए, नदी के अवरोधों को हटाया जाए तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था कराई जाए, ताकि खरीफ की बची हुई फसलों को बचाया जा सके और आगामी रबी की बुवाई समय से हो सके।

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में किसानों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

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